पासवान ने दिए संकेत, बदल रहा है 2019 का सियासी मौसम

सियासी गलियारों में यह बात आम है कि लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान चुनाव के वक्त जिस तरफ झुकते हैं, उधर की सियासी फिजा बदल रही होती है। अतीत में पासवान कई बार इस तरह के संकेत देकर अपना पाला बदल चुके हैं। कभी एनडीए तो कभी यूपीए और फिर एनडीए, उनका ठिकाना बदलता रहता है। पासवान का सियासी मिजाज अक्सर तय कर देता है कि हवा किस ओर बह रही है। सियासी गलियारों में उन्हें राजनीति का मौसम विज्ञानी भी कहा जाता है। लेकिन इस बार रामविलास पासवान ने नहीं, उनके बेटे चिराग पासवान ने संकेत दिया है। ये वही चिराग पासवान हैं जिन्होंने 2014 में अपने पिता को यूपीए छोड़कर एनडीए के साथ जाने की सलाह दी थी। आज पासवान केंद्र में मंत्री हैं और कांग्रेस सत्ता से बाहर। 

चाचा-भतीजे ने दिया संकेत

राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता इसे पासवान ने हर बार साबित किया है। तो क्या इस बार भी वह साथी बदलने जा रहे हैं? रामविलास पासवान के बेटे और लोजपा केंद्रीय संसदीय बोर्ड अध्यक्ष चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस ने सियासी गर्मी बढ़ा दी। मौका देख लोजपा ने सीट बंटवारे पर मोलभाव शुरू कर दिया है। चिराग पासवान ने आज दो ट्वीट कर सियासी हलचल पैदा कर दी। पहले ट्वीट में उन्होंने सहयोगी दलों के प्रति भाजपा के रूख पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि भाजपा को अपने सहयोगियों को एकजुट रखने के प्रयास करने होंगे। क्योंकि हाल ही में रालोसपा और टीडीपी जैसे दल एनडीए से अलग हो गए हैं। 

 

उनका दूसरा ट्वीट आगामी चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर था। इस ट्वीट में चिराग ने लिखा-

गठबंधन की सीटों को लेकर कई बार भारतीय जनता पार्टी के नेताओ से मुलाकात हुई परंतु अभी तक कुछ ठोस बात आगे नहीं बढ़ पाई है। इस विषय पर समय रहते बात नहीं बनी तो इससे नुक़सान भी हो सकता है।

वहीं, रामविलास पासवान के भाई और लोजपा के कोटे से बिहार सरकार में पशु और मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति पारस ने भाजपा को 31 दिसंबर तक सीटों पर फैसला करने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को एनडीए के सभी नेताओं के साथ बैठक करनी चाहिए। उन्होंंने झारखंड और उत्तरप्रदेश में भी सीटों की मांग कर डाली। 

चिराग के ट्वीट तीन राज्यों में भाजपा को लगे झटके के बाद आने वाली दिक्कतों की शुरुआत कही जा सकती है। नतीजों के बाद भाजपा बैकफुट पर है। ऐसे में अब सहयोगी दल उसपर दबाव बढ़ा सकते हैं। चिराग ने मोर्चा खोलने की शुरुआत कर दी है। 

 

 

 

 

 

साभार अमर उजाला

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