यूपी: 5 करोड़ की ठगी का बड़ा खुलासा, ऐसे जाल में फंसाती थीं गैंग लीडर महिला, आठ गिरफ्तार

मेरठ में गंगानगर थाना पुलिस ने ठग गैंग का खुलासा कर एक महिला समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह अच्छी कंपनियों में नौकरी लगवाने के नाम पर अभी तक चार से पांच करोड़ तक की ठगी कर चुका है। कंपनी से बरामद 500 युवकों के रिकॉर्ड से करीब 1.25 करोड़ की ठगी का रिकॉर्ड सामने आ चुका है। बताया जाता है कि इस गैंग को महिला ही लीड कर रही थी।

 

एसपी देहात अविनाश पांडेय ने बताया कि गंगानगर के एक युवक ने शिकायत की थी उससे एक कंपनी में नौकरी लगवाने के नाम पर 25 हजार रुपये ठग लिए गए। उससे आधार, पैन कार्ड, मार्कशीट, दो फोटो और अन्य कागजात लेकर उसका एक फार्म भरवाया और 25 हजार रुपये बैंक खाते में डलवा लिए। बाद में कहा कि पंजाब में एक कंपनी में नौकरी मिल जाएगी। कई माह बीतने के बाद भी न तो नौकरी मिली और न ही उसके पैसे लौटाए गए। बेगमबाग में यह ऑफिस चल रहा है।

 

एसपी देहात के अनुसार जांच के बाद आईपीएस अधिकारी कुलदीप गुनावट और गंगानगर पुलिस के साथ ऑफिस में छापा मारा तो वहां एक महिला और तीन युवतियों के अलावा तीन युवक मिले। सभी को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया। गंगानगर निवासी आरोपी अनुज और सुभाष नगर निवासी दक्ष से पूछताछ की तो पता चला करीब एक साल से वह नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी कर रहे हैं। यूपी के अलावा दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश में ऑफिस खोलकर सैकड़ों लोगों से ठगी कर चुके हैं। मेरठ में जहां इस गिरोह के अभी 12 नाम सामने आए हैं, वहीं अलग-अलग राज्यों में 50 से अधिक युवक -युवती जुड़े हैं। आरोपियों के पास से नौ मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, कई कंपनियों के फर्जी फार्म, फोटो और कंप्यूटर बरामद किए गए हैं। 

बैंक खातों में डलवाई रकम
एसपी देहात के अनुसार जांच में सामने आया कि यह गैंग नौकरी लगवाने के नाम पर 500 से ज्यादा युवाओं से प्रति युवक 25 हजार रुपये की ठगी कर चुका है। इनमें युवतियों से भी ठगी गई है। फर्जी आईडी लगाकर खातों में पैसा डलवाने के लिए अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए। जो युवक जितने पैसे देता था उसे उसी के अनुसार कंपनी में नौकरी का झांसा देते थे। सभी राज्यों का हिसाब लगाएं तो पांच करोड़ से ज्यादा की ठगी की जा चुकी है। इनके बैंक खातों की जांच की जा रही है।

युवती करती थीं कॉल
ऑफिस में तीन युवतियां कॉलिंग के लिए रखी गई थीं, जिन्हें आठ हजार रुपये दिए जाते थे। वह कॉलिंग कर युवकों को नौकरी लगवाने की जानकारी देती थीं।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
साभार अमर उजाला

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