गैर-मुस्लिम प्रवासी बन सकेंगे भारतीय

मोदी सरकार ने पड़ोसी मुल्कों के गैरमुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता
देने का कदम फिर उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को इससे जुड़े नागरिकता संशोधन कानून को मंजूरी दे दी। विधेयक को इसी हफ्ते लोकसभा में पेश किया जा सकता है। लेकिन इस पर सियासत भी तेज हो गई है। बीजेपी जहां इस मुद् को 2024 दे तक अपने सबसे बड़े अजेंडे
के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे समाज को बांटने वाला बता रहा है। प्रस्तावित नागरिक संशोधन विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को आसान शर्तों के साथ भारत की नागरिकता देने का
प्रावधान है। नागरिकता कानून के तहत अभी भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम 11 वर्ष भारत में रहना जरूरी है। लेकिन संशोधित कानून लागू होने के बाद एक साल पहले तक उन देशों से भारत आए प्रवासियों को नागरिकता मिल सकेगी। इसका फायदा देश में रह
रहे हजारों गैर-मुस्लिम प्रवासियों को होगा।  संशोधित बिल में क्या बदलाव हैं? इसका
खुलासा विधेयक के संसद में पेश होने के बाद ही होगा। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, पूर्वोत्तर राज्यों के विरोध को देखते हुए उन्हें बड़ी राहत दी गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *