सुलतानपुर के संत सुशील गिरि भी हुए पालघर में भीड़ की हिंसा का शिकार

महाराष्ट्र के पालघर में 16 अप्रैल को दो संतों समेत जिन तीन लोगों की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, उनमें सुलतानपुर के मूल निवासी संत सुशील गिरि भी शामिल थे। वह जूना अखाड़े से जुड़े थे। घटना पर संतों में रोष है और उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, उनके परिवार में शोक का माहौल है।

सुशील गिरि महाराज उर्फ रिंकू दूबे जिले के चांदा कस्बे के निवासी थे। वर्ष 1997 में पिता ने किसी बात को लेकर डांट दिया तो वह अपने ननिहाल पट्टी प्रतापगढ़ चले गए। वहां से रेलवे स्टेशन गए और एक अनजान ट्रेन पर बैठ गए। संयोग से वह ट्रेन मुंबई तक ही जाती थी। वे वहां उतरे ही थे कि जूना अखाड़े के कुछ संतों से मुलाकात हो गई, जिससे वे साधुओं के अखाड़े में पहुंचे। वहां रामगिरि महाराज से दीक्षा लेकर पूजा पाठ में रम गए।

सुशील गिरि की मां मनराजी देवी ने बताया कि 2005 में वह कानपुर सत्संग में आए थे। वहीं पर उनकी मुलाकात उनके बचपन के मित्र ज्वाला दूबे से ही गई। काफी मनाने के बाद वह घर आए तो जरूर, लेकिन सप्ताह भर बाद फिर चले गए।

घटना के चार घंटे पहले हुई थी बात : 16 अप्रैल को घटना के चार घंटे पहले सुशील गिरि महाराज ने घर पर वीडियो कॉल कर अपनी मां मनराजी से बात करते हुए कहा था- मां गुरुजी के अंतिम संस्कार में जा रहा हूं, तुमसे मिलने की बहुत इच्छा हो रही है। लॉकडाउन के बाद घर आऊंगा तो खूब बात करेंगे।

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