शहर बदायूॅ का लावेला चौक अब भगवान परशुराम चौक के नाम से जाना जाएगा

शहर बदायूं का लावेला चौक अब भगवान परशुराम चौक के नाम से जाना जाएगा l

आज इसका शिलान्यास आचार्य डा. राधेश्याम अवस्थी”रसेन्दु” की अध्यक्षता में शिष्य आचार्य सन्तोष कुमार शब्देन्दु व शिवेन्द्र पाण्डेय ने वैदिक मन्त्रोच्चार के साथ विधिवत् पूजन कराकर नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता, चेयरमैन दीपमाला गोयल, जिलाधिकारी कुमार प्रशांत,पं. रामाशंकरभारद्वाज पूर्व विधायक प्रेम स्वरुप पाठक, अजय मिश्र व महिला अध्यक्ष श्रीमति रजनी मिश्रा के कर कमलों द्वारा किया गया ll

रोहित शर्मा की रिपोर्ट

अखिल भारतीय विधार्थी परिषद नगर इकाई उझानी ने पोस्टर विमोचन का किया कार्यक्रम

 

 

 

 

अखिल भारतीय विधार्थी परिषद नगर इकाई उझानी ने किया पोस्टर विमोचन

बदायूॅ| अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नगर इकाई उझानी के द्वारा आज दिनांक 15/12/20 को उझानी के पुराने टाकीज के सामने अलीगढ़ में होने जा रहे 61 बां प्रांत अधिवेशन के पोस्टर का विमोचन का कार्यक्रम किया गया जिसमें उझानी के नगर अध्यक्ष श्री रामकिशन शर्मा जी ने विद्यार्थी परिषद् की गतिविधयों के बारे में बताया उन्होंने बताया कि आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् देश का नहीं बल्कि विश्व का सबसे बड़ा छात्र संघठन बन चुका है जिसका हर साल की तरह इस बार भी 61 बा प्रांत अधिवेशन अलीगढ़ में होने जा रहा है।इसी बीच उपस्थित नगर मंत्री नवीन राठौर ने बताया कि इस कोरोना काल में हमारे विद्यार्थी परिषद् के जितने भी कार्यक्रम होते है बो सभी ऑनलाइन हुए है लगभग फरबरी के बाद अब यह कार्यक्रम निश्चित हुआ है जिसमें सभी जिले के कार्यकर्ता मिलेंगे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् का राष्ट्रीय अधिवेशन नागपुर में होने जा रहा है जिसमें हमारे बीच सभी प्रांत के कार्यकर्ता जुड़ेंगे जिसका हमे ऑनलाइन सभी का मार्गदर्शन होगा और हमारे सभी पदाधिकारी मौजूद रहेंगे ।जिसमें मौजूद उझानी के प्रशान्त सक्सेना, शिवम् कुमार, संजय शाक्य विष्णु मोर्या, शेखर शर्मा, आकाश, यशवीर सिंह तोमर, शौर्य प्रताप, यश गोपाल सिंह आदि मौजूद रहे।।

 

शैलेश पाठक के आवास पर हुई किसान पंचायत

शैलेश पाठक के आवास पर हुई किसान पंचायत

हम हैं के संस्थापक व किसान नेता डॉ शैलेश पाठक के दातागंज स्थित आवास पर आज किसान पंचायत हुई जिसमें सैकड़ों प्रमुख किसानों ने भाग लिया।पंचायत को संबोधित करते हुए डॉ पाठक ने कहा कि हमारा अन्नदाता किसान है जिसके दम पर भारत की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है।आज किसान अपनी समस्याओं को लेकर विचलित है किसान के ऊपर सरकार को निर्णय नहीं थोपना चाहिए।किसान के हित का निर्णय किसान से चर्चा होने के बाद ही कानून के रूप में लागू होना चाहिए।उन्होंने घने कोहरे में किसानों के धरना को लेकर गहन चिंता जताई।उन्होंने कहा सरकार को किसानों से कुछ समय लेकर बिल पर यथासंभव निर्णय लेकर तत्काल धरना प्रदर्शन को स्वयं पहल करके खत्म करना चाहिए अन्यथा यदि देश का किसान भड़क गया तो क्रांति आ जाएगी क्योंकि किसान को आंसू गैस के गोले व पुलिस का लाठीचार्ज डरा नहीं सकता।किसान सिर्फ प्यार और सम्मान की भाषा से संतुष्ट हो सकता है।उन्होंने कहा मैं स्वयं एक किसान हूं मैं जानता हूं कि किसान इस समय किन परिस्थितियों से गुजर रहा है।सदैव प्राकर्तिक आपदाओं से ग्रस्त किसान को यदि सरकारें भी परेशान करेगी तो उस अन्नदाता का विकास कैसे होगा।

इस मौके पर राकेश वर्मा, पंजाब सिंह यादव, जोरावर यादव, सुनील मिश्रा, ठाकुर मनोज सोलंकी, सुधीर अग्निहोत्री, मोहम्मद अशरफ, मोहम्मद हारून, विनोद मैथिल, पंकज मिश्रा, ओमेंद्र पाल, मुनेश गुप्ता, गंगाराम कश्यप, रामदयाल राठौर, ठाकुर ओम राज सिंह, सुधीर पाठक समेत सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।

बाबरी विध्वंस मामले में शहीद कारसेवको की आत्मा की शांति के लिए शिवसैनिक करेंगे हवन पूजन

बाबरी विध्वंस में शहीद कारसेवकों की आत्मा की शांति के लिए शिवसैनिक करेंगे हवन -पूजन।

बाराबंकी। 28 वर्ष पूर्व अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद के विवादित ढ़ांचे को गिराने के लिए एकत्रित हुए और शहीद कारसेवकों की आत्मा की शांति के लिए और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बाराबंकी के सिविल लाइन स्थित किशन काम्प्लेक्स में प्रातः 10 बजे हवन-पूजन का आयोजन किया जाएगा समस्त शिवसैनिकों को इस कार्यक्रम में पहुंचना आवश्यक है। इस कार्यक्रम की जानकारी शिवसेना प्रदेश महासचिव किशनलाल रावत ने दी।

अब देश को बचाने के लिए ला रहे ‘चीट इंडिया’, बिकाऊ कलाकारों की लिस्ट से बाहर हुए इमरान हाशमी

इमरान हाशमी हिंदी सिनेमा के बिकाऊ कलाकारों की लिस्ट से कब के बाहर हो चुके हैं। ‘द डर्टी पिक्चर’ के बाद से इमरान की ऐसी कोई फिल्म नहीं आई जिसे बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट का तमगा मिल सका हो। अब अगले महीने उनकी फिल्म ‘चीट इंडिया’ रिलीज हो रही है। इमरान बता रहे हैं कि क्या है ये फिल्म और बतौर प्रोड्यूसर अब आगे का उनका सफर कैसा होगा ।

 

 

– इमरान, देश की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद गड़बड़ियों को लेकर तमाम फिल्में इन दिनों बन रही हैं। ‘चीट इंडिया’ के जरिए आप क्या कहना चाह रहे हैं?
‘हमारी शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से टूट चुकी है और इससे सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि हम सब प्रभावित हो रहे हैं। जैसे मैं अपने बच्चे की शिक्षा के लिए डरा रहता हूं। हमारी जो शिक्षा व्यवस्था है उसकी कोई दिशा नहीं है। दुनिया को इस शिक्षा से देखा जाए तो कोई फायदा आगे चलकर नहीं मिलता। दलाल शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर रहे हैं। हम इसी बात को हाईलाइट कर रहे हैं ‘चीट इंडिया’ में। फिल्म में मेरे किरदार यानी कि राकेश का बहुत बड़ा नेटवर्क है। वह ऐसे लोगों को मेरिट लिस्ट में जगह दिलाता है जो काबिल नहीं है। ये फिल्म दिखाती है कि कैसे अच्छे छात्र इस माफिया के चलते हाशिये पर चले जाते हैं। देश की शिक्षा व्यवस्था को एक क्त्रसंति की जरूरत है और ये जितनी जल्दी हो सकेए होनी चाहिए।

 

-तो ये राकेश कौन है? कहां से आया और इसको अपने कारोबार की खुराक कहां से मिलती है?

राकेश का अड्डा उत्तर प्रदेश के झांसी में है। दो बार मेडिकल में फेल हो चुका है। गायक बनना चाहता था। लेकिन वह कुछ नहीं बन पाया तो उसके भीतर इस पूरी व्यवस्था के खिलाफ जबर्दस्त गुस्सा है। वह व्यवस्था की कमजोरियां जान चुका है। वह पैसे लेकर किसी को भी मेरिट लिस्ट में पहुंचा सकता है। ये शिक्षा व्यवस्था की भीतरी गड़बड़ियां दिखाता हैए मुझे उम्मीद है कि फिल्म को देखकर देश के हुक्मरान असली दिक्कत समझ सकेंगे और इसे सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।

 

-आप फिल्म प्रोड्यूसर बन चुके हैं। बतौर प्रोड्यूसर आप पर अब कितना दबाव रहता है?
जब मैं किसी फिल्म में सिर्फ अभिनय कर रहा होता हूं तो मेरा काम होता है सेट पर जाकर शूटिंग कर देना। लेकिन प्रोड्यूसर बनना अलग है। अब मैं फिल्म की स्क्रिप्टिंग से लेकर रिलीज तक इसमें शामिल रहता हूं। मैं ये तय कर सकता हूं कि फिल्म कैसी बनेगी। मैं फिल्म की एडिटिंग में शामिल रहता हूं। मेरा मकसद है कि मैं फिल्म मेकिंग के हर स्टेप पर इसमें शामिल रहूं तो इसीलिए मैं फिल्म प्रोड्यूसर बना।

-फिल्म चीट इंडिया का विषय जब आपको मिला तो आपकी पहली प्रतिक्त्रिस्या क्या थी?
फिल्म के निर्देशक सौमिक सेन ने जब मुझे ये कहानी सुनाई तो मेरी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि आखिर इस विषय पर अब तक कोई हिंदी फिल्म क्यों नहीं बनी । इस फिल्म को मैं एक हीरो की फिल्म के तौर पर नहीं देखता। ये फिल्म पूरी व्यवस्था को एक माफिया की नजर से देखते हैं जो पूरे सिस्टम को अपने हिसाब से चला रहा है। यह अपने आप में इस विषय को देखने का बहुत ही रोचक नजरिया लगा मुझे।

 
 
 
 
 
 
 
 
साभार अमर उजाला